मधुमक्खियों के हमले में शहीद हुई आंगनबाड़ी कर्मी: बच्चों को बचाते हुए कंचन बाई मेघवाल ने दी अपनी जान, रानपुर की बेटी बनी साहस की मिसाल | @NeemuchToday

नीमच टुडे न्यूज़ | नीमच जिले के रानपुर गांव से इंसानियत और साहस की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। मधुमक्खियों के हमले में जान गंवाने वाली आंगनबाड़ी कर्मी कंचन बाई मेघवाल अब सिर्फ एक नाम नहीं रहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षा और साहस की मिसाल बन गई हैं। आठ साल की मासूम जीविका की आंखें भर आती हैं, जब वह कहती है, दादी हमें पानी पिला रही थी। मधुमक्खियां आईं तो उन्होंने हमें कंबल से ढक दिया। बाद में देखा तो दादी जमीन पर पड़ी थीं। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों के मुताबिक, खतरा देखते ही कंचन बाई ने बिना अपनी जान की परवाह किए बच्चों को दरी, तिरपाल और अपनी साड़ी से ढक दिया। बच्चों को अंदर कमरे में भेजते समय वह खुद मधुमक्खियों के हमले के बीच खड़ी रहीं। हजारों डंक लगने से उनकी हालत गंभीर हो गई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। कंचन बाई के पति पैरालिसिस से पीड़ित हैं और परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी वही बेटे रवि ने कहा, “मां को खोने का दर्द है, लेकिन गर्व है कि उन्होंने दूसरी मांओं की गोद उजड़ने से बचा ली।”

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