नीमच टुडे न्यूज़ | महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता किशोर जेवरिया ने कहा कि यह बिल पहले ही 2023 में संसद से पास होकर कानून बन चुका है, लेकिन इसके लागू होने की प्रक्रिया अभी जनगणना और परिसीमन से जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रावधान है, जिसमें एससी-एसटी के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित हैं, जबकि ओबीसी आरक्षण शामिल नहीं है। साथ ही यह व्यवस्था रोटेशन आधारित और 15 वर्षों के लिए सीमित है। सरकार द्वारा परिसीमन और जनगणना को लेकर तय शर्तों पर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि बिना बदलाव के भी इसे लागू किया जा सकता है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।