नीमच टुडे न्यूज़ | नीमच ऋण मुक्ति, विघ्नों के नाश और मनवांछित फल प्रदान करने वाला जिन सहस्त्रनाम विधान अत्यंत पुण्य फलदाई है। यह विचार मालवा की लाल माटी पर ऐतिहासिक पंचकल्याणक संपन्न कराने वाले संत आचार्य 108 विराग सागर जी महाराज की सुशिष्या, परम पूज्य भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी ने व्यक्त किए। वे दिगंबर जैन समाज नीमच द्वारा 40 विद्युत केंद्र के पीछे स्थित दिगंबर जैन मंदिर सभाकक्ष में आयोजित आदिनाथ पदमप्रभु मोक्ष कल्याणक महोत्सव के अवसर पर जिन सहस्त्रनाम महाअर्चना विधान मंडल में उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित कर रही थीं।
आर्यिका माताजी ने कहा कि इस विधान में सहभागी बनने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं, रोग, शोक, भय और तनाव से मुक्ति मिलती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है। उन्होंने बताया कि इस विधान का पुण्य 68 तीर्थों की यात्रा के समान है और गुरुमुख से निकले मंत्र शीघ्र फल प्रदान करते हैं। कार्यक्रम में 108 परिवारों ने 1008 मंत्रों के उच्चारण के साथ आहुतियां दीं। शांति धारा, जलाभिषेक, यज्ञ एवं दीप प्रज्वलन किया गया। पुरुष श्वेत एवं महिलाएं पीले वस्त्रों में सहभागी बनीं। धर्मसभा में आर्यिका ज्ञेम्याश्री, ज्ञापकश्री, ज्ञेयश्री एवं क्षुल्लिका विज्ञप्ति श्री का सानिध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।