नीमच टुडे न्यूज़ | नीमच मालवा की लाल माटी पर ऐतिहासिक पंचकल्याणक करवाने वाले संत आचार्य 108 विराग सागर जी महाराज की शिष्या, परम पूज्य भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी का नीमच में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर हजारों की संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और माताजी का स्वागत किया। आर्यिका माताजी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि साधु-संतों के सानिध्य के बिना आत्म कल्याण का मार्ग नहीं मिलता।
उन्होंने बताया कि साधु संत त्याग और संयम का पालन करते हुए समाज कल्याण में अग्रणी होते हैं। माताजी ने श्रोताओं को शुद्ध भक्ति, पवित्र भोजन और मोबाइल से दूर रहकर प्रवचन में बैठने की सलाह दी। उनके अनुसार साधु संतों का दर्शन हमारे पाप कर्मों को कम कर सकता है और 28 जन्मों के पापों की निरंजरा का मार्ग दिखा सकता है। इस अवसर पर दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष विजय जैन, उपाध्यक्ष जयकुमार बज, महिला मंडल अध्यक्ष चमेली शाह सहित अन्य पदाधिकारी और वरिष्ठ समाजजन उपस्थित थे। धर्मसभा का संचालन अजय कासलीवाल ने किया। आर्यिका माताजी का ससंघ बही पारसनाथ से जयपुर की ओर प्रस्थान करेगा। नीमच में उनका प्रवास 9 बजे दिगंबर भजन मांगलिक भवन में प्रवचन के साथ जारी रहेगा।