कस्टमाइज़्ड आर्टिफिशियल आई से लौटी मुस्कान और आत्मविश्वास |@NeemuchToday

नीमच टुडे न्यूज़ |  बचपन में एक दर्दनाक हादसे में आंख गंवाने वाले जितेन्द्र जी की जिंदगी अब नई उम्मीद से भर गई है। मात्र 5 वर्ष की उम्र में लगी गंभीर चोट के कारण उनकी आंख की रोशनी बचाई नहीं जा सकी, और समय के साथ प्रभावित आंख छोटी होने से चेहरे की बनावट भी बदल गई। कई जगह इलाज के बाद भी जब समाधान नहीं मिला, तब उन्होंने गोमाबाई नेत्रालय में संपर्क किया। यहां विशेषज्ञों द्वारा उनके लिए कस्टमाइज़्ड ऑक्यूलर प्रोस्थेसिस (Artificial Eye) तैयार किया गया, जो देखने की क्षमता तो नहीं देता, लेकिन बिल्कुल प्राकृतिक आंख जैसा दिखाई देता है। प्रोस्थेसिस लगने के बाद उनके चेहरे की सुंदरता में सुधार आया और सबसे महत्वपूर्ण—उनका आत्मविश्वास वापस लौटा। अब वे समाज में अधिक सहजता और सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि आधुनिक चिकित्सा केवल इलाज ही नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाती है।

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