नीमच टुडे न्यूज़ | चीताखेड़ा गांव के दूल्हें सिंह करीब 45 वर्ष के हैं। पिता का साया नहीं है, सिर्फ बूढ़ी मां सहारा हैं। वे पिछले ढाई साल से मुंह के कैंसर से जूझ रहे हैं। पहले विमल गुटखा खाते थे, लेकिन कैंसर का पता चलने के बाद सब छोड़ दिया। बीमारी ने उनके मुंह और गले को इस कदर जकड़ लिया कि अब ऑपरेशन भी संभव नहीं है। कैंसर मुंह में फट चुका है। दूल्हें सिंह दिनभर बिस्तर पर पड़े रहते हैं, न ठीक से बोल पाते हैं और न ही कोई काम कर पाते हैं। उनकी बूढ़ी मां बेटे की हालत बताते हुए रो पड़ती हैं। वह कहती हैं कि मेरा बेटा बहुत मेहनती था, लेकिन कैंसर ने उसकी जिंदगी छीन ली। अब उसे इस हालत में देखकर न जीया जाता है और न ही मरते बनता है।