नीमच टुडे न्यूज़ | रतनगढ़ (निप्र)। समकालीन हिंदी बाल साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। प्रसिद्ध साहित्यकार ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ की दो प्रेरणादायक कहानियाँ ‘कलम की पूजा’ (कक्षा 8वीं) और ‘शिप्रा की आत्मकथा’ (कक्षा 5वीं) को राष्ट्रीय स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इन रचनाओं का चयन मुंशी प्रेमचंद, रवींद्रनाथ टैगोर, सोहनलाल द्विवेदी और लियो टॉलस्टॉय जैसे महान साहित्यकारों की कृतियों के साथ किया गया है, जो समकालीन लेखन की सार्थक स्वीकृति को दर्शाता है। इसी क्रम में हिंदी उपन्यास ‘मैत्री का सफर’ का मराठी अनुवाद ‘मैत्रीचा प्रवास’ प्रसिद्ध अनुवादक रेवती पाटिल द्वारा किया गया है। उनके द्वारा अनूदित पाँच अन्य बाल साहित्य पुस्तकें भी पर्ल पब्लिकेशन, कोल्हापुर से प्रकाशित हुई हैं। ये उपलब्धियाँ हिंदी–मराठी साहित्यिक समन्वय को मजबूती देने के साथ बाल पाठकों को प्रेरणा और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।