नीमच टुडे न्यूज़ | नीमच भारतीय संस्कृति के प्रमुख त्योहारों में शामिल होली का पर्व नीमच शहर में प्राचीन परंपराओं और धार्मिक विधि-विधान के साथ मनाया जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा पर दानागली व कुम्हारा गली चौराहे की ऐतिहासिक होली विशेष पहचान रखती है। यहां होली डांडा और धर्मध्वज को प्रहलाद स्वरूप मानकर पूजन किया जाता है तथा गोबर के बड़कूले, नारियल और खेरा-खंडा अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद अधर्म स्वरूप ईंधन का दहन कर नई फसल की गेहूं बालियां सेंककर प्रसाद रूप में ग्रहण की जाती हैं। इस परंपरा की शुरुआत शहर व छावनी स्थापना काल से मानी जाती है। माघ पूर्णिमा पर मुरली मनोहर मंदिर के पुजारी द्वारा धर्मध्वज स्थापना की जाती है, जिसे पिछले 60 वर्षों से पं. राधेश्याम उपाध्याय द्वारा निरंतर संपन्न कराया जा रहा है। वहीं होली दहन की पूजा बूढ़ा गोपाल मंदिर के पुजारी पं. जयप्रकाश शर्मा कराते हैं। दो मंदिरों की संयुक्त भागीदारी इस होली को विशिष्ट बनाती है। दूसरे दिन सामाजिक सद्भाव के साथ रंगोत्सव मनाया जाता है।