रजिस्टर्ड डाक सेवा समाप्ति पर पुनर्विचार की मांग, हारून रशीद कुरैशी ने उठाया मुद्दा | @NeemuchToday

नीमच टुडे न्यूज़ | नीमच देश में लगभग डेढ़ सौ वर्षों से प्रचलित पारंपरिक रजिस्टर्ड डाक सेवा को समाप्त कर उसे स्पीड पोस्ट में विलय किए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग उठने लगी है। पूर्व पार्षद एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता हारून रशीद कुरैशी ने इस संबंध में भारत सरकार के संचार मंत्रालय के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए इसे जनहित से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। कुरैशी ने कहा कि रजिस्टर्ड डाक सेवा लंबे समय से आम नागरिकों के लिए एक विश्वसनीय, सुरक्षित और किफायती माध्यम रही है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, मध्यमवर्गीय परिवारों, सामाजिक संगठनों तथा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत आवेदन करने वाले लोगों के लिए यह सेवा बेहद उपयोगी थी। इससे महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रमाणिक तरीके से कम लागत में भेजे जा सकते थे। उन्होंने बताया कि पहले रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजने पर लगभग 26 रुपये का खर्च आता था, जबकि अब स्पीड पोस्ट के माध्यम से वही पत्र भेजने पर 55 से 70 रुपये या उससे अधिक खर्च करना पड़ रहा है। इससे आम नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आरटीआई आवेदकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कुरैशी ने सरकार से जनहित को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार कर पारंपरिक रजिस्टर्ड डाक सेवा को पुनः शुरू करने की मांग की है।

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