नीमच टुडे न्यूज | दो दिन पहले ज्ञानोदय मल्टी स्पेशलिटी हास्पिटल में इलाज के दौरान मरीज सुधीर चौहान पिता मनोहरलाल चौहान की मृत्यु हो गई थी। गाय के हमले से सुधीर गंभीर घायल हुआ था, जिसका इलाज पहले सरकारी अस्पताल में चला बाद में ज्ञानोदय हास्पिटल मे रैफर कर दिया गया। इस संबंध में ज्ञनोदय मल्टी स्पेशलिटी हास्पिटल के मेडिकल सुपरीटेंड डॉ. प्रदीप जैन ने बताया कि मरीज की हालत अत्याधिक गंभीर थी, वह अचेत अवस्था में था, जिसे चिकित्सा भाषा में जीसीएस, एमवीएम कहते हैं। उसके शरीर में कोई हचल नहीं थी, आंखों की पुतलिया फैली हुई थी और मष्तिक में सूजन थी।
कान से भी खून रिस रहा था, ऐसे में मरीज का जीवन बचाने के लिए परिजनों की स्वीकृति के बाद तुरंत ऑपेशन किया गया और बाद में आईसीयू में रखा गया। अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के इलाज में कोई लापवाही नहीं बरती। मरीज के परिजनों से सिर्फ इमरजेंसी चार्ज 15000 रुपए लिए गए जबकि ढ़ाई लाख का ऑपरेशन अस्पताल प्रबंधन के खर्चें पर किया गया। डॉ. प्रदीप जैन ने कहा परिजन जो आरोप लगा रहे हैं वे झूठे हैं। अस्पताल में सारी स्थितियों से रूबरू होने के बाद वे डेडबॉडी लेकर गए और 15000 रुपए के अलावा कोई राशि नहीं दी।

डेढ़ लाख रुपए दिए तो सबूत दे-ज्ञानोदय
डॉ. प्रदीप जैन ने कहा मरीज के परिजनों को सभी स्थितियों से बताने के बाद ही ऑपरेशन किया गया। डेढ़ लाख रुपए नहीं दिए, अगर परिजन ऐसे आरोप लगा रहे हैं तो सबूत दे। रसीद या कुछ तो होगा, अस्पताल में हर खर्च की रसीद दी जाती है। परिजनों के झूठे आरोप हैं।

पहले ऑपेशन किया- बाद में आयुष्मान का पंजीयन
ज्ञानोदय के मेडिकल सुपरीटेंड डॉ. प्रदीप जैन ने कहा मरीज के आने के बाद पहला लक्ष्य उसका जीवन बचाना होता है। अस्पताल प्रबंधन अपने खर्चे पर ऑपरेशन करता है, तीन दिन बाद आष्युमान पंजीयन होता है और उसके बाद मालूम पड़ता हे कि बीमारी कवर्ड हो रही है या नहीं। सुधीर का पहले ऑपरेशन किया गया, बाद में आष्युमान पंजीयन किया गया। रेफर रेकेट नहीं- सरकार के निर्देश रैफर रेकेट के झूठे आरोप ज्ञानोदय मल्टी स्पेशलिटी हास्पिटल पर लगाए जा रहे हैं जबकि इस मामले में सरकार के स्पष्ट निर्देश है कि जीवन बचाने के लिए मरीज को उस क्षेत्र के नजदीकी हास्पिटल भेजा जाए, जहां उससे संबंधित स्पेशलिट डॉक्टर मौजूद हो। सरकार द्वारा पीएम राहत योजना भी शुरू कि जिसमें भी यही नियम है।