रंभावली में 13 दिसंबर को भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का त्रिदिवसीय जन्म कल्याणक (पौष दशमी मेला) महोत्सव को लेकर बैठक संपन्न हुई |@NeemuchToday

नीमच टुडे न्यूज़। मध्यप्रदेश की सीमा से लगा रंभावली गांव में कलिकाल कल्पतरु प्रकट प्रभावी श्री सहस्त्रफणा पार्श्वनाथ भगवान का अतिप्राचीन तीर्थ धाम की पावन धरा पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी परम पूज्य आचार्य भगवंत जगत चंद्र  सूरीश्वर जी म.सा. के परम् शिष्य पन्यास प्रवर चंद्रयश विजय जी म.सा. आदि ठाणा 3 एवं परम् पूज्य साध्वी शासन ज्योति म.सा.आदि ठाणा 3 की शुभ निश्रा में आगामी दिवस 13 दिसंबर 2025 शनिवार को तीन दिवसीय भगवान के जन्म कल्याणक (पौष दशमी मेला ) एवं शिखर जिर्णोद्धार व द्वितीय धर्म ध्वजा महोत्सव पर भव्य मेले का आयोजन रंभावली श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्री संघ एवं रंभावली पार्श्वनाथ जैन तीर्थ मेला समिति के तत्वावधान में आयोजित करने हेतु एक आवश्यक बैठक सम्पन्न हुई।उपरोक्त जानकारी रंभावली पार्श्वनाथ जैन तीर्थ जिनालय ट्रस्टी सदस्य संजय मेहता एवं अजीत चौरड़िया ने प्रेस विज्ञप्ति में देते हुए बताया है कि भगवान पार्श्वनाथ जी के जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर  आगामी दिवस 13 दिसंबर 2025 शनिवार से 15 दिसंबर 2025 सोमवार को तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए जाने हेतु  एक आवश्यक बैठक आयोजित हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि शिखर जिर्णोद्धार व द्वितीय धर्म ध्वजा लाभार्थी डॉ अभिजीत जैन मंदसौर के कर कमलों द्वारा चढ़ाई जाएगी। इस महोत्सव में अधिक से अधिक श्रावक श्राविकाओं द्वारा तपस्या तेला किए जाने का भी निर्णय लिया गया है। इस अवसर पर प्रातः 8 बजे पक्षाल पूजा, प्रातः 8:30 बजे केसर पूजा, प्रातः 9 बजे पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक प्रवचन एवं रथयात्रा, दोपहर 12:15 बजे मेले में आने वाले सभी भक्तों के लिए स्वामी वात्सल्य किया जाएगा। इस मौके पर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी के जिनालय को विद्युत रोशनी से जगमगाया जाएगा। पौष दशमी मेले में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अनुयायियों भगवान के दिव्य दर्शन एवं मेले का आनंद लेने पहुंचेंगे। बैठक में मुख्य रूप से ट्रस्ट के संरक्षक शांतिलाल मेहता, ट्रस्ट अध्यक्ष पारसमल लासोड, ट्रस्ट उपाध्यक्ष सुशील चौधरी, ट्रस्ट कोषाध्यक्ष गुणवंत लाल बंडी, ट्रस्ट सचिव कांतिलाल दक सहित ट्रस्ट मंडल एवं रंभावली श्री संघ सदस्य बैठक में विशेष रूप से मौजूद थे।श्री पार्श्वनाथ जिनालय ट्रस्टीयों ने क्षेत्र के समस्त जैन अनुयायियों से अनुरोध है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ लें।

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