सुदामा कोई साधारण भक्त नहीं, ब्रह्म को जानने वाले ब्रह्मज्ञानी थे, गृहस्थ में रहकर भी त्याग और विरक्ति का आदर्श जीवन जिया : पं. रमाकांत गोस्वामी | @NeemuchToday

 नीमच टुडे न्यूज़ | नीमच चौकन्ना बालाजी के समीप स्थित कमल अग्रसेन भवन परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन का भव्य समापन हवन-पूजन, महाआरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ। कथा के अंतिम दिन कथा मर्मज्ञ पं. रमाकांत गोस्वामी ने सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि सुदामा ब्रह्म को जानने वाले ब्रह्मज्ञानी थे। वे गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी पूर्णतः विरक्त थे और साधारण व्यक्ति नहीं थे। पं. गोस्वामी ने कहा कि धर्म के नाम पर किसी का अधिकार छीनने वाला व्यक्ति दरिद्रता भोगता है। बिना गुरु के भवसागर पार नहीं किया जा सकता| 

रावण विद्वान था, पर गुरु न होने से उसका पतन हुआ। उन्होंने बताया कि सुदामा जानते थे कि गुरु माता द्वारा दिए गए चने श्रापित हैं, फिर भी अपने मित्र श्रीकृष्ण को दरिद्रता से बचाने के लिए स्वयं वह श्राप अपने ऊपर ले लिया। कथा के दौरान पं. गोस्वामी ने अनेक भजनों—“बंता मेरे यार सुदामा रे भाई…”, “अरे द्वारपालो जाके कन्हैया से कह दो…” आदि—से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से नृत्य किया और कथा में डुबकी लगाई। मुख्य यजमान सिंहल परिवार द्वारा व्यासपीठ पूजन कर पं. गोस्वामी का सम्मान किया गया। साप्ताहिक कथा का समापन आरती एवं पूर्णाहुति के साथ हुआ।

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