नीमच टुडे न्यूज़ | चीताखेड़ा जैन धर्म के लिए मंगलवार का दिन चीताखेड़ा के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया, जब परम् पूज्य आचार्य श्री जगच्चंद्र सूरिजी म.सा. सहित 2 आचार्य, 3 पंन्यास, 16 मुनिराज एवं 3 साध्वी श्रीजी म.सा. का एक साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जीरन से राजस्थान छोटीसादड़ी के रंभावली विहार के दौरान दो दिवसीय स्थिरता हेतु संतों का यह आगमन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम बन गया। गांव के प्रमुख मार्ग जयकारों, ढोल-ढमाकों और भक्ति गीतों से गूंज उठे।
अल सुबह से ही जैन श्रावक-श्राविकाएं, युवा, बुजुर्ग एवं महिलाएं अपने व्यवसाय बंद कर साधु-साध्वी भगवंतों की एक झलक पाने को पलक-पावड़े बिछाए खड़े रहे। घर-घर रंगोली सजाई गई और अक्षत गऊली से आत्मीय अभिनंदन किया गया। श्री मुनि सुब्रत स्वामी जिनालय पहुंचते-पहुंचते मंगल प्रवेश धर्मसभा में परिवर्तित हो गया। धर्मसभा में आचार्य श्री जगच्चंद्र सूरिजी म.सा. ने व्याख्यान देते हुए कहा कि आत्मा में अपार शक्ति है, बस उसे जगाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज हर इंसान अपनी अनुकूलता के लिए पाप से जुड़ता जा रहा है, जबकि धर्म और व्रत ही पुण्य का मार्ग हैं। इस ऐतिहासिक अवसर ने पूरे क्षेत्र को धर्ममय वातावरण से ओतप्रोत कर दिया।