नीमच टुडे न्यूज़ | सालों से जावद विधानसभा से चुनाव लड़ने का ख्वाब देख रहे कांग्रेस नेता सत्यनारायण पाटीदार का एक व्हाटस एप मैसेज ने बवाल खड़ा कर दिया है। इस मैसेज मे उन्होंने जो शब्द इस्तेमाल किए, उसे लेकर बहस छिड़ गई है। लोग कह हैं कि सत्तु पाटीदार को क्या हो गया, वे अब कुत्ता-कुतिया पर उतर आए हैं। अभी से ऐसे शब्दो का इस्तेमाल कर रहे हैं तो वे क्या चुनाव लड़ेंगे और क्या जीतेंगे। एक नेता को सधे हुए शब्दों में मैसेज करना चाहिए लेकिन सत्तु पाटीदार गलीछाप छूटभैया नेता की तरह शब्दों का इस्तेमाल कर मैसेज कर रहे हैं। उन्हें टिकट मिलेगा या नहीं, चुनाव लड़ेंगे या नहीं यह दूर की बात है लेकिन जो शब्द उन्होंने लिखे हैं, उससे सत्तु पाटीदार की मानसिकता भी परखी जा सकती है। सत्तु पाटीदार ने अपने मोबाइल नंबर से जो व्हाट्स एप मैसेज में लिखा कि विधानसभा में चर्चा शुर हो गई है। सत्तु पाटीदार लिखते हैं जावद में कुत्ते बहुत हो गए हैं.. पाले हुए कुत्ते ज्यादा हो गए है, एक गांव से दूसरे गांव ये कुत्ते मिल जाते हैं,भागते ज्यादा है, इनका इलाज जरूरी है, कलेक्टर महोदय से बात हो गई है, बाहर से आए कुत्ते और गांव के कुत्तो का इलाज करना पड़ेगा। कुत्ते-कुतियों के लिए सलाह चाहिए इसलिए सलाहकार बनाना है, कुत्ते-कुतियों का खुजली ज्यादा हो रही है, इसलिए इलाज बहुत जरूरी है, इसलिए शासन से इलाज कराना जरूरी है। बीमारी की जड़ कहा है,इसलिए डॉक्टर से पता लगवा रहे हैं। इस तरह से कुत्तों-कुतियां शब्दो का इस्तेमाल कर सत्तु पाटीदार किस पर निशाना साध रहे हैं, और किस को कुत्ता-कुतिया कह रहे हैं, यह भी स्पष्ट नहीं लेकिन जो शब्द वे इस्तेमाल कर रहे हैं, वे गांधीवादी नेता के नहीं हो सकते और न ही किसी सभ्य नागरिक के। अब सवाल उठता है कि सत्तु पाटीदार गलीछाप छूटभैय्या नेता की जुंबा क्यों बोल रहे हैं, क्या वे उनकी गुरू मीनाक्षी नटराजन के संस्कार भूल गए और इस तरह शब्दों पर उतर आए। मामला जो भी कुत्ता-कुतिया जैसे शब्दो का इस्तेमाल कर सत्तु पाटीदार ने बताया कि वे कितना पढ़े- लिखे है और कितनी समझ रखते हैं।