नीमच टुडे न्यूज़ | नीमच जय जिनेंद्र रिसोर्ट के पास गणपति नगर स्थित सिद्धिविनायक मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव का बुधवार को भक्तिमय वातावरण में समापन हुआ। अंतिम दिन कथा की पूर्णाहुति हवन-पूजन, आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ संपन्न हुई। व्यास पीठ से कथा वाचन करते हुए पंकज कृष्ण महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि कृष्ण-सुदामा की मित्रता संसार में सच्ची और निष्काम मित्रता का सर्वोत्तम उदाहरण है। उन्होंने बताया कि सुदामा ने जीवनभर गरीबी और कष्ट सहन किए, लेकिन कभी अपने मित्र कृष्ण से सहायता की अपेक्षा नहीं की। सुदामा स्वाभिमानी थे और उन्होंने अपने मित्र को दुखी देखने के बजाय स्वयं कष्ट सहना स्वीकार किया। समय आने पर भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा को दोनों लोकों की खुशियों का वरदान देकर मित्रता का सच्चा धर्म निभाया। महाराज ने कहा कि सुदामा ब्रह्मज्ञानी थे और उन्होंने गुरु माता द्वारा दिए गए श्रापित चनों को स्वयं खाकर मित्र पर संकट आने से बचाया। यह कथा आज के युग में भी त्याग, प्रेम और मित्रता की प्रेरणा देती है।अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजक समिति द्वारा व्यास पीठ, कथा मर्मज्ञ एवं वाद्य यंत्र कलाकारों का सम्मान भी किया गया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।