देश की वर्तमान स्थिति पर कवियों ने रखे बेबाक विचार, कृति की पावस कवि गोष्ठी में कविता के जरिए उठे कई सवाल | @NeemuchToday

नीमच टुडे न्यूज़ | नीमच की प्रमुख साहित्यिक संस्था कृति द्वारा जिला स्तरीय पावस कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्षता कर रहे पारस जैन एवं सुलोचना जैन ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया। संस्था अध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी ने अतिथियों, कवियों एवं श्रोताओं का स्वागत किया। गोष्ठी का केंद्रीय विषय देश की वर्तमान परिस्थितियां और वर्षा ऋतु रहा। विभिन्न कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, सत्ता, राष्ट्र, प्रेम, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं को स्वर दिया। सत्येन्द्र सक्सेना ने वर्षा और कारगिल विजय दिवस पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं, जबकि श्याम चौहान ने समय की शक्ति को अपनी कविता का विषय बनाया।

राधेश्याम शर्मा ने कलम और सत्ता के संबंध पर विचार रखे तो रेणुका व्यास एवं किशोर जेवरिया ने नेताओं के बदलते व्यवहार और राजनीतिक अवसरवाद पर व्यंग्य किया। विजय बैरागी ने व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों पर कविता सुनाई। धर्मेन्द्र शर्मा ने समय, रिश्तों और जीवन की स्मृतियों को गीतों में पिरोया, वहीं निरंजन गुप्त 'राही' ने अपनी गजल से सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्ति दी। संचालन सविता चौधरी ने किया। समापन पारस जैन की कविता से हुआ, जिसमें उन्होंने युवाओं से किसी भी आंदोलन में शामिल होने से पहले उसके उद्देश्य और पृष्ठभूमि को समझने की सीख दी। कार्यक्रम के अंत में संस्था की सदस्यों की विवरणिका का लोकार्पण किया गया तथा सचिव रघुनंदन पाराशर ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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